सबसे ज्यादा नुकसान की जानकारी शाजापुर जिले में सामने आई है जहां करीब 30 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। यहां गेहूं का रकबा 1.76 लाख हेक्टेयर है। रायसेन में 20 प्रतिशत नुकसान की आशंका है। भिंड, मुरैना, शिवपुरी जिले में मार्च की शुरुआत में तीन बार ओलावृष्टि हुई। इससे करीब 70 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई। गौरतलब है राज्य में इस बार 101.84 लाख हेक्टेयर में गेहूं की पैदावार हो रही है जो पिछले साल की तुलना में 33 फीसदी ज्यादा है। मंडियों में गेहूं की आवक शुरू ही हुई थी कि लॉकडाउन से सब थम गया। कहीं-कहीं तो पांच से 15 फीसदी फसल की कटाई भी नहीं हो पाई है। प्रदेश में पंजाब से बड़ी संख्या में फसल कटाई के लिए हार्वेस्टर सहित अन्य मशीनें लेकर लोग आते हैं जो वापस जा चुके हैं। मजदूर भी नहीं मिल रहे।
32.61% ज्यादा उत्पादन की उम्मीदों पर लॉकडाउन फेर सकता है ‘पानी’
कृषि विभाग का अनुमान है कि स्थितियां सामान्य रही तो पिछले साल से इस बार 82.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं अधिक होगा जो पिछले साल की तुलना में 32.61 फीसदी ज्यादा रहेगा। कृषि वैज्ञानिक सतीश शर्मा के मुताबिक पिछले मानसून सीजन में प्रदेश में लगातार बारिश के कारण जमीन देर तक गीली रही और सिंचाई के लिए पानी पर्याप्त मिला। इससे उत्पादकता भी बढ़ी। प्रदेश में गेहूं पैदावार का जो अनुमान है, उसके हिसाब से देश में होने वाले उत्पादन में मप्र का योगदान 31.58 प्रतिशत रहेगा, जबकि पिछले साल यह 24.39 प्रतिशत था। इस बार देश में गेहूं का उत्पादन 10.661 करोड़ टन होने का अनुमान है।
जिले में 60 प्रतिशत हाे चुकी है गेहूं की कटाई, लेकिन आगे की रुकी
धार जिले में गेहूं की कटाई लगभग 60 प्रतिशत हाे चुकी है। हालांकि इसके बाद की कटाई काेराेना वायरस संक्रमण काे लेकर घाेषित लाॅकडाउन और बारिश के कारण नहीं हाे सकी है। जिला मालवा और निमाड़ दाे क्षेत्राें में विभक्त है। इसलिए यहां बाेवनी अागे-पीछे हाेती है। निमाड़ क्षेत्र में कई किसानाें ने देरी से बाेवनी की है इसलिए उन्हाेंने देरी से कटाई प्रारंभ की। वर्तमान में मालवा क्षेत्र में कटाई चल रही थी। अब जनता कर्फ्यू अाैर लाॅकडाउन के चलते कटाई नहीं हाे पा रही है। इस बार पानी की उपलब्धता के कारण जिले में दाे लाख 60 हजार हेक्टेयर रकबा में गेहूं की बाेवनी की गई।